Nivaan Logo
दर्द तो उम्र के साथ होता ही है – क्या यह सच है?
Dr. Abhimanyu Rana

Created By: NIVAAN Team

Reviewed By: Dr. Abhimanyu Rana | 12+ Years Of Experience Treating Pain | Pain Management Specialist

Last Updated: 29 May 2026

दर्द तो उम्र के साथ होता ही है – क्या यह सच है?

छोटा जवाब: नहीं, यह पूरी तरह सच नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ दर्द होने का खतरा ज़रूर बढ़ता है, लेकिन दर्द में जीना उम्र का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। ज़्यादातर मामलों में दर्द किसी अंदरूनी कारण (जैसे ऑस्टियोआर्थराइटिस, डिस्क की समस्या या नस का दबाव) से होता है – सिर्फ़ “उम्र” से नहीं। सही जाँच और इलाज से इसे काफ़ी हद तक ठीक या कम किया जा सकता है।

“उम्र का दर्द” – मिथक बनाम सच्चाई

बहुत से लोग मान लेते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ ज़्यादा बीमारियाँ और ज़्यादा दर्द आना तय है। यह सोच आधी ही सही है। यह सच है कि उम्रदराज़ लोगों में क्रॉनिक पेन (पुराना दर्द) का जोखिम ज़्यादा रहता है, पर दर्द में जीना ज़रूरी नहीं है। दर्द हमेशा शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत होता है – कोई भी शरीर सिर्फ़ उम्र की वजह से दर्द की हालत में आने के लिए “बना” नहीं होता।

दिलचस्प बात यह है कि “ग्रोइंग पेन्स” यानी बढ़ते बच्चों की टाँगों का दर्द भी इसी ग़लतफ़हमी का शिकार है। डॉक्टर मानते हैं कि बढ़ने की प्रक्रिया से दर्द होने का कोई प्रमाण नहीं है – यानी दर्द को सीधे “उम्र” से जोड़ देना अक्सर ग़लत होता है, चाहे वह बचपन हो या बुढ़ापा।

तो फिर उम्र के साथ दर्द क्यों बढ़ता है?

उम्र खुद दर्द का कारण नहीं है, पर उम्र के साथ शरीर में कुछ बदलाव आते हैं जो दर्द की संभावना बढ़ाते हैं। पीठ दर्द इसका सबसे आम उदाहरण है। कई लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ़ 50+ उम्र की समस्या है, पर रीढ़ में उम्र से जुड़े बदलाव 30 और 40 की उम्र में ही शुरू हो सकते हैं।

उम्र से जुड़े दर्द के सबसे आम कारण:

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस (घिसाव वाला गठिया): समय के साथ जोड़ों की कार्टिलेज और डिस्क घिसने लगती है, जिससे हड्डियाँ रगड़ खाती हैं और नसें सूजकर दर्द देती हैं।
  • हर्नियेटेड (खिसकी हुई) डिस्क: उम्र के साथ डिस्क की नमी और लचक कम होती है; बाहरी परत सूखकर फटने लगती है और अंदर का जेल जैसा हिस्सा बाहर निकलकर नसों पर दबाव डालता है।
  • स्पाइनल स्टेनोसिस: रीढ़ की नलिका सिकुड़ने से अंदर की नसें दबती हैं और दर्द के संकेत दिमाग तक भेजती हैं।
  • अन्य स्थितियाँ: डायबिटीज़, कार्डियोवैस्कुलर रोग और न्यूरोलॉजिकल बीमारियाँ भी पुराने दर्द से जुड़ी होती हैं।

और पढ़ें – पेन किलर खाने के नुकसान और इसके बेहतर विकल्प

अनदेखा किया गया दर्द क्यों ख़तरनाक है

कई बुज़ुर्ग “दर्द तो उम्र के साथ होता ही है” मानकर इलाज नहीं कराते। यह सोच नुक़सानदेह है, क्योंकि बिना इलाज के दर्द कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है:

  • नींद में गड़बड़ी
  • मानसिक स्वास्थ्य पर असर (तनाव, चिंता, अवसाद)
  • गिरने और चोट लगने का जोखिम
  • पोषण की कमी और दैनिक जीवन की गुणवत्ता में गिरावट

भारत में यह कोई छोटी समस्या नहीं है – विशेषज्ञों के अनुसार 45 साल से ऊपर के लगभग आधे भारतीय जोड़ों के दर्द के साथ जी रहे हैं। इसलिए दर्द को नज़रअंदाज़ करना नहीं, बल्कि उसका कारण ढूँढना ज़रूरी है।

उम्र के साथ दर्द से कैसे बचें?

बीमारी या चोट को पूरी तरह टालना संभव नहीं, पर कुछ आदतें जोखिम काफ़ी घटा देती हैं:

  • स्वस्थ वज़न बनाए रखें: अतिरिक्त वज़न घुटनों, कूल्हों और पीठ पर दबाव डालता है और शरीर में सूजन बढ़ाता है।
  • नियमित व्यायाम करें: उम्र के अनुसार स्ट्रेचिंग, कोर स्ट्रेंथनिंग और कार्डियो रीढ़ व जोड़ों को सहारा देते हैं।
  • संतुलित आहार लें: हड्डियों के लिए कैल्शियम और सूजन घटाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स शामिल करें।
  • अच्छी नींद लें: नींद के दौरान शरीर ख़ुद की मरम्मत करता है और रिकवरी तेज़ होती है।
  • समस्या को टालें नहीं: दर्द लगातार बना रहे या बढ़े, तो जल्दी जाँच कराएँ – जल्दी पहचान से क्रॉनिक स्थिति टाली जा सकती है।

डॉक्टर को कब दिखाएँ?

दर्द को “सामान्य” मानकर टालना तब ख़तरनाक है जब:

  • दर्द कुछ दिनों में ठीक न हो या लगातार बढ़ता जाए
  • दर्द के साथ सुन्नपन, झनझनाहट या कमज़ोरी महसूस हो
  • दर्द रोज़मर्रा के काम, चलने या सोने में रुकावट डाले
  • दर्द किसी ख़ास गतिविधि के साथ बार-बार लौटे

आपको किसी भी उम्र में दर्द के साथ जीने की ज़रूरत नहीं है।

और पढ़ें – कमर दर्द के 8 मुख्य कारण जो ज़्यादातर लोग नज़रअंदाज़ करते हैं

Nivaan Care भारत का एडवांस्ड पेन मैनेजमेंट क्लिनिक है, जो बिना सर्जरी दर्द की जड़ का इलाज करने पर केंद्रित है। यहाँ “गोली खाओ और आराम करो” पर नहीं रुका जाता – आपके लिए एक पूरी टीम और संरचित इलाज की योजना बनाई जाती है:

  • इंटरवेंशनल पेन स्पेशलिस्ट: सटीक जाँच (X-ray, MRI, CT) के बाद दर्द का असली स्रोत पहचानते हैं और मिनिमली-इनवेसिव इलाज जैसे एपिड्यूरल, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन, रीजनरेटिव प्रोसीजर आदि करते हैं।
  • फिज़ियोथेरेपिस्ट: ताक़त, मूवमेंट और पोस्चर बहाल करते हैं।
  • पेन काउंसलर और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट: दर्द के साथ आने वाले डर, तनाव और सूजन को कम करने में मदद करते हैं।

इसी टीम-आधारित, सबूतों पर आधारित तरीक़े से कई लोग सर्जरी से बच जाते हैं और फिर से सामान्य ज़िंदगी जीने लगते हैं।

निष्कर्ष

“दर्द तो उम्र के साथ होता ही है” – यह एक सुविधाजनक मिथक है, सच्चाई नहीं। उम्र दर्द का जोखिम बढ़ाती है, पर दर्द का असली कारण लगभग हमेशा कोई ठीक होने वाली स्थिति होती है। सही समय पर जाँच और सही इलाज से उम्र के दर्द को कम किया जा सकता है।क्या आप या आपके परिवार में कोई लंबे समय से दर्द झेल रहा है? Nivaan Care पर अपना पेन असेसमेंट बुक करें और जानें कि बिना सर्जरी राहत कैसे संभव है।

उम्र के साथ दर्द का जोखिम बढ़ता है, पर दर्द ख़ुद उम्र का परिणाम नहीं है। यह आमतौर पर ऑस्टियोआर्थराइटिस, डिस्क की समस्या या नस के दबाव जैसी ठीक होने वाली स्थितियों से होता है।

रीढ़ में उम्र से जुड़े बदलाव 30 और 40 की उम्र में ही शुरू हो सकते हैं, सिर्फ़ 50+ में नहीं।

हाँ। Nivaan जैसे एडवांस्ड पेन क्लिनिक में एपिड्यूरल, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन, फिज़ियोथेरेपी और रीजनरेटिव प्रोसीजर जैसे नॉन-सर्जिकल विकल्पों से दर्द की जड़ का इलाज होता है।

अगर दर्द कुछ दिनों में ठीक न हो, बढ़ता जाए, या सुन्नपन/कमज़ोरी के साथ हो, तो तुरंत पेन स्पेशलिस्ट से मिलें।